स्मार्ट सिटी योजना के तहत कानपुर के घंटाघर पर आधुनिक लाइटिंग लगाई गई थी। कुछ समय तक यह व्यवस्था चली, लेकिन अब महीनों से लाइट बंद पड़ी है। चौराहे पर जो पोल पर तिरंगा लहराता था, वह भी गायब है।
स्मार्ट सिटी योजना के तहत कानपुर के घंटाघर पर आधुनिक लाइटिंग लगाई गई थी। कुछ समय तक यह व्यवस्था चली, लेकिन अब महीनों से लाइट बंद पड़ी है। चौराहे पर जो पोल पर तिरंगा लहराता था, वह भी गायब है। सवाल यह है कि जब इस पर लाखों करोड़ों रुपये खर्च किए गए थे, तो क्या रखरखाव (maintenance) का कोई प्रावधान नहीं था? अगर था, तो जिम्मेदार कौन है? और अगर नहीं था, तो योजना बनाते समय इतनी बड़ी लापरवाही क्यों हुई? स्मार्ट सिटी का मतलब सिर्फ उद्घाटन और फोटो नहीं, बल्कि निरंतर देखरेख और जवाबदेही भी है। कानपुर के नागरिक जानना चाहते हैं इस परियोजना पर कुल कितना खर्च हुआ? मेंटेनेंस के लिए कितना बजट तय था? और आज यह व्यवस्था बंद क्यों है? नगर निगम और मेयर कार्यालय को इस पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए।